Rameshwaram Jyotirlinga: रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग में धुल जाते हैं सारे पाप, जानें क्या है यहां के कुंड का रहस्य कैसे जाना है रामेश्वर चलिए जानते है संपूर्ण जानकारी।

 

Rameshwaram Jyotirlinga: रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग में धुल जाते हैं सारे पाप, जानें क्या है यहां के कुंड का रहस्य कैसे जाना है रामेश्वर चलिए जानते है संपूर्ण जानकारी।




रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग की रोचक बातें:

रामेश्वरम तमिलनाडु के रामनाथपुरम में स्थित है. कहते हैं दक्षिण में रामेश्वरम की महत्ता उत्तर में काशी के समान है. यहां रामनाथस्वामी के रूप में शिवलिंग की पूजा की जाती है.

हिंदू मान्यताओं के अनुसार यहां कुंड में स्नान के बाद पापों से मुक्ति मिल जाती है. कहते हैं यहां मौजूद 24 कुंड (थीर्थम)का पानी इतना गुणकारी है कि इसमें डुबकी लगाने के बाद गंभीर बीमारी भी खत्म हो जाती है. यहां के थीर्थम का रहस्य आज तक कोई नहीं सलझा पाया. मान्यता है कि श्री राम ने अमोघ बाणों से इन कुंड का निर्माण किया था.

रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग में गंगाजल से शिवलिंग का अभिषेक किया जाता है. इसके लिए विशेष तौर पर उत्तराखंड से गंगाजल यहां लाया जाता है.

किसने की रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग की स्थापना



पौराणिक कथा के लंका विजय के बाद श्रीराम पर ब्रह्म हत्या का पाप लगा था, क्योंकि रावण ब्राह्मण था. इस पाप का पार्यश्चित करने के लिए ऋषियों ने भगवान राम से शिवलिंग स्थापित कर अभिषेक करने के लिए कहा था. प्रभू श्रीराम ने पाप से मुक्ति पाने के लिए दक्षिणी तट पर बालू से शिवलिंग बनाकर अभिषेक किया. एक और मान्यता है कि लंका से लौटते वक्त भगावन राम दक्षिण भारत के समुद्र तट पर रुके थे. ब्रह्म हत्या के पाप को मिटाने के लिए उन्होंने हनुमान जी को पर्वत से शिवलिंग लाने के लिए कहा, बजरंगबली को आने में देरी हुई तो माता सीता ने दक्षिण तट पर बालू से शिवलिंग स्थापित किया. इसे रामनाथ कहा गया. इसे रामलिंग कहा गया. वहीं हनुमान जी द्वारा लाए शिवलिंग का नाम वैश्वलिंग रखा गया. तभी से यहां दोनों शिवलिंग की पूजा की जाती है. इसी कारण रामेश्वरम का रामनाथस्वामी ज्योतिर्लिंग भी कहा जाता है.

रामेश्वरम मंदिर का इतिहास




मान्यताओं के अनुसार, भगवान राम ने लंका विजय की कामना से लंका जाने से पहले भगवान शिव की पूजा करना चाहते थे. तब उन्होंने इस जगह पर महादेव के शिवलिंग की स्थापना कर इसकी पूजा अर्चना की थी. भगवान राम के नाम से ही इस जगह का नाम रामेश्वरम द्वीप और मंदिर का नाम रामेश्वरम पड़ा.

पुराणों के अनुसार, रावण एक ब्राह्मण था और ब्राह्मण को मारने के दोष को खत्म करने के लिए भगवान राम भगवान शिव की पूजा करना चाहते थे, लेकिन तब इस द्वीप पर कोई मंदिर नहीं था, इसलिए हनुमान जी को कैलाश पर्वत से भगवान शिव के शिवलिंग लाने के लिए कहा गया. जब हनुमान जी समय पर शिवलिंग लेकर नहीं पहुंच पाए, तब माता सीता ने समुद्र की रेत को मुट्ठी में उठाकर शिवलिंग का निर्माण किया और इसी शिवलिंग की भगवान राम ने पूजा की. हनुमान जी के द्वारा लाए गए शिवलिंग को भी यहीं पर स्थापित कर दिया गया

रामेश्वरम मंदिर कैसे पहुंचें – How To Travel Rameshwaram Temple In Hindi


मदुरै रामेश्वरम से 163 किलोमीटर की दूरी पर है जो रामेश्वरम का सबसे नजदीकी हवाई अड्डा है। यदि आप फ्लाइट से जाना चाहते हैं तो मदुरै के लिए मुंबई, बंगलूरू और चेन्नई से फ्लाइट पकड़ सकते हैं।


यदि आप रामेश्वरम, चेन्नई, मदुरै, कोयम्बटूर, त्रिचि,तंजावुर और अन्य महत्वपूर्ण शहरों से रेलमार्ग द्वारा जुड़ा हुऔ है।


इसके अलावा रामेश्वरम, मदुरै, कन्याकुमारी, चेन्नई और त्रिचि से सड़क मार्ग द्वारा भी जुड़ा है। आप सड़क मार्ग से भी बहुत आसानी से रामेश्वरम पहुंच सकते हैं। इसके अलावा पांडिचेरी और तंजावुर से मदुरै होते हुए रामेश्वरम जा सकते हैं। रामेश्वरम शहर पहुंचने के बाद रामेश्वरम मंदिर जाने के लिए आप जीप, आटोरिक्शा या साइकिल रिक्शा ले सकते हैं


मदुरै रामेश्वरम से 163 किलोमीटर की दूरी पर है जो रामेश्वरम का सबसे नजदीकी हवाई अड्डा है। यदि आप फ्लाइट से जाना चाहते हैं तो मदुरै के लिए मुंबई, बंगलूरू और चेन्नई से फ्लाइट पकड़ सकते हैं।

यदि आप रामेश्वरम, चेन्नई, मदुरै, कोयम्बटूर, त्रिचि,तंजावुर और अन्य महत्वपूर्ण शहरों से रेलमार्ग द्वारा जुड़ा हुऔ है।

इसके अलावा रामेश्वरम, मदुरै, कन्याकुमारी, चेन्नई और त्रिचि से सड़क मार्ग द्वारा भी जुड़ा है। आप सड़क मार्ग से भी बहुत आसानी से रामेश्वरम पहुंच सकते हैं। इसके अलावा पांडिचेरी और तंजावुर से मदुरै होते हुए रामेश्वरम जा सकते हैं। रामेश्वरम शहर पहुंचने के बाद रामेश्वरम मंदिर जाने के लिए आप जीप, आटोरिक्शा या साइकिल रिक्शा ले सकते हैं

. रामेश्वरम मंदिर में पूजा का समय – Pooja Timing Of Rameswaram Temple In Hindi
रामेश्वरम मंदिर को सुबह पांच बजे श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया जाता है। श्रद्धालु पहले पहर में सुबह पांच बजे से लेकर दोपहर एक बजे तक दर्शन पूजन कर सकते हैं। ठीक एक बजे मंदिर को बंद कर दिया जाता है। इसके बाद दूसरे पहर में शाम तीन बजे मंदिर दोबारा खोला जाता है। इस पहर में शाम तीन बजे से रात के नौ बजे तक दर्शन किया जा सकता है। आपको बता दें कि रामेश्वर मंदिर में होने वाली प्रत्येक पूजा का अलग अलग नाम है और ये पूजा अलग अलग समय पर होती है। इस पूजा का विशेष महत्व होता है इसलिए रामेश्वर मंदिर जाने वालों को इनमें जरूर शामिल होना चाहिए।

तड़के सुबह पांच बजे मंदिर खुलने के बाद सबसे पहले पल्लीयाराई दीप आराधना(Palliyarai Deepa Arathana) नामक पूजा होती है।
सुबह पांच बजकर दस मिनट पर स्पादिगलिंगा दीप आराधना (Spadigalinga Deepa Arathana) होती है।
सुबह पांच बजकर पैंतालिस मिनट पर थिरुवनन्थाल दीप आराधना(Thiruvananthal Deepa Arathana),
सुबह सात बजे विला पूजा(Vila Pooja), सुबह दस बजे कालासन्थी पूजा(Kalasanthi Pooja),
दोपहर बारह बजे ऊचीकला पूजा(Uchikala Pooja), शाम छह बजे सयारात्चा पूजा(Sayaratcha Pooja),
रात साढ़े आठ बजे अर्थजामा पूजा(Arthajama Pooja),
रात आठ बजकर पैंतालीस मिनट पर पल्लीयाराई पूजा(Palliyarai Pooja) होती है।
मंदिर में नकद, सोने और चांदी के आभूषण चढ़ाने के लिए अनुमति लेनी पड़ती है। इन वस्तुओं को चढ़ाने वाले श्रद्धालु का नाम मंदिर के खातों में दर्ज किया जाता है और उसे रसीद दी जाती है। इसके अलावा मंदिर में गंगाजल पीतल, तांबे या कांसे के बर्तन से ही चढ़ाने की अनुमति है। श्रद्धालुओं को टिन या लोहे के बर्तन में जल लेकर नहीं जाना चाहिए।।



टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

नेपाल के पशुपतिनाथ मंदिर का इतिहास एवम भगवान शिव के पशुपतिनाथ रूप की कहानी चलिए जानते है

अमृतसर के स्वर्ण मंदिर के बारे में संपूर्ण जानकारी कब और किसने बनवाया और इसका इतिहास।