सास बहू मंदिर, ग्वालियर -

 

सास बहू मंदिर, ग्वालियर -

किलों के शहर ग्वालियर के सास-बहू मंदिर के बारे में जानते हैं आप ?



मध्य प्रदेश के उत्तर में स्थित ग्वालियर शहर अपने आप में इतिहास की कई गाथाएं समेटे हुए है और राज्य के पर्यटन मानचित्र पर अपना विशेष स्थान भी रखता है। इतिहास की पुस्तकों में उल्लेख मिलता है कि ग्वालियर गुर्जर-प्रतिहार राजवंश, तोमर तथा बघेलों की राजधानी रहा है। ग्वालियर को गालव ऋषि की तपोभूमि भी कहा जाता है। ग्वालियर को इतिहास और आधुनिकता का अनोखा संगम भी कह सकते हैं। यहां के दर्शनीय स्थलों की बात करें तो सबसे पहले सूर्य मंदिर का नाम आता है। ग्वालियर का सूर्य मंदिर देश के अन्य मंदिरों के लिए एक आदर्श है। यह मंदिर पंडे−पुजारियों और भिखारियों के आतंक से तो मुक्त है ही साथ ही अन्य जगहों की अपेक्षा यहां सफाई पर भी अत्यधिक ध्यान दिया गया है। यह सूर्य मंदिर ओडिशा के कोणार्क मंदिर की शैली पर बना है। लाल पत्थर से निर्मित इस भव्य मंदिर के चारों ओर मनोरम उद्यान भी हैं।





मध्य प्रदेश के उत्तर में स्थित ग्वालियर शहर अपने आप में इतिहास की कई गाथाएं समेटे हुए है और राज्य के पर्यटन मानचित्र पर अपना विशेष स्थान भी रखता है। इतिहास की पुस्तकों में उल्लेख मिलता है कि ग्वालियर गुर्जर-प्रतिहार राजवंश, तोमर तथा बघेलों की राजधानी रहा है। ग्वालियर को गालव ऋषि की तपोभूमि भी कहा जाता है। ग्वालियर को इतिहास और आधुनिकता का अनोखा संगम भी कह सकते हैं। यहां के दर्शनीय स्थलों की बात करें तो सबसे पहले सूर्य मंदिर का नाम आता है। ग्वालियर का सूर्य मंदिर देश के अन्य मंदिरों के लिए एक आदर्श है। यह मंदिर पंडे−पुजारियों और भिखारियों के आतंक से तो मुक्त है ही साथ ही अन्य जगहों की अपेक्षा यहां सफाई पर भी अत्यधिक ध्यान दिया गया है। यह सूर्य मंदिर ओडिशा के कोणार्क मंदिर की शैली पर बना है। लाल पत्थर से निर्मित इस भव्य मंदिर के चारों ओर मनोरम उद्यान भी हैं।

प्रमुख ऐतिहासिक स्थल



भारत के प्रमुख किलों में गिना जाने वाला ग्वालियर का किला राजा मानसिंह ने गूजरी रानी के प्रति प्रेम को प्रदर्शित करने के लिए बनवाया था। बलुए पत्थर की पहाड़ी पर निर्मित इस किले में छह महल हैं जिनमें से मान मंदिर और मृगनयनी का गूजरी महल प्रमुख है। 15वीं सदी में बना यह किला भारतीय वास्तुकला का उत्कृष्ट नमूना है। रानी झांसी का स्मारक भी देखने योग्य है। इस स्मारक में 1857 के स्वतंत्रता संग्राम की नायिका रानी लक्ष्मीबाई की विशाल अश्वारूढ़ प्रतिमा तथा समाधि है। यह किला रानी का बलिदान स्थल भी है। मुहम्मद गौस तथा तानसेन का मकबरा भी आप देखने जा सकते हैं। गुरु−शिष्य परम्परा के प्रतीक इस स्थल में मुगल शैली में निर्मित तानसेन के प्रारम्भिक गुरू मुहम्मद गौस का मकबरा है। इसी विशाल और भव्य मकबरे के अहाते में संगीत सम्राट तानसेन की क्रब भी है।



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