2023 में द्वारकाधीश मंदिर आप भी जाना चाहते है तो तो जानें इससे जुड़ी रोचक बातें

 

2023 में द्वारकाधीश मंदिर आप भी जाना चाहते है तो  तो जानें इससे जुड़ी रोचक बातें



द्वारकाधीश मंदिर इतिहासकारों का मानना है कि द्वारकाधीश मंदिर का निर्माण भगवान श्री कृष्ण के पोते ने करवाया है. ऐसा अनुमान लगाया जाता है कि ये मंदिर 2500 वर्ष पुराना है. ये द्वारका मंदिर आज समुद्र में समाहित है. और इस द्वारका नगरी में द्वारकाधीश मंदिर स्थित है.

बता दें कि मंदिर में दो मुख्य प्रवेश द्वार हैं. मुख्य प्रवेश द्वार को मोक्ष द्वार और दूसरे को स्वर्ग द्वार कहा जाता है. मंदिर 5 मंजिला बना हुआ है. मंदिर का स्तंभ 78.3 मीटर ऊंची है. इस बात को बहुत कम ही लोग जानते होंगे कि यहां मंदिर का ध्वज दिन में 5 बार बदला जाता है. जिसका निश्चित समय है. इतना ही नहीं, इसकी खास बात यह है कि इस ध्वज को भक्तों द्वारा ही स्पॉन्सर किया जाता है. यानी भक्त पहले ही बुकिंग करवा लेते हैं.

52 गज का होता है ध्वज




बता दें कि द्वारकाधीश मंदिर का ध्वज 52 गज का होता है. इसके पीछे कई तरह के मिथक प्रचलित है. एक मिथक के अनुसार 12 राशि, 27 नक्षत्र, 10 दिशाएं, सूर्य, चंद्र, और श्री द्वारकाधीश मिलकर 52 हो जाते हैं. इसलिए ध्वज को 52 गज का रखा जाता है. वहीं, एक अन्य मान्यता के अनुसार एक समय में द्वारका में 52 द्वार थे और ये उसी का प्रतीक है. मंदिर का ये ध्वज एक खास दरजी द्वारा ही सिला जाता है. ध्वज बदलने की प्रक्रिया के दौरान उसे देखने की मनाही होती है. इस ध्वज पर सूर्य और चंद्र बने हुए हैं और ऐसा माना जाता है कि जब तक सूर्य और चंद्र रहेगा, द्वारकाधीश का नाम रहेगा

द्वारका कब जाना चाहिए?




बात करें द्वारका किस मौसम में जाए तो द्वारका जाने के लिए सबसे उचित मौसम नवंबर से फरवरी तक का होता है। क्योंकि इस दौरान यहाँ का अधिकतम तापमान 34 डिग्री सेल्सियस होता है और न्यूनतम नौ डिग्री सेल्सियस होता है, जो यात्रा के लिए काफी अनुकूल होता है।


जगद मंदिर द्वारकाधीश द्वारका गुजरात

जगद मंदिर द्वारकाधीश

द्वारका,गुजरात के गोमती नदी के तट पर स्थित द्वारका जिले का एक शहर है। द्वारका नाम संस्कृत शब्द ‘द्वार’ से लिया गया है जिसका अर्थ है दरवाजा, द्वारका यह भारत के सात प्राचीन शहरों में से एक है, जो जगद मंदिर द्वारकाधीश के लिए प्रसिद्ध है और जहां कृष्ण ने शासन किया था।


इसलिए,यह हिंदुओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण तीर्थ स्थान में से एक है। और भगवान कृष्ण के राज्य की प्राचीन और पौराणिक राजधानी कहा जाता है। द्वारका हिंदुओं के लिए पवित्र तीर्थ स्थान चार धाम और सप्त पुरी में से एक है।

द्वारकाधीश मंदिर की कहानी और पौराणिक कथाएं



हिंदू कथा के अनुसार, द्वारका नगरी को कृष्ण द्वारा समुद्र से प्राप्त भूमि के एक टुकड़े पर बनाया गया था। ऋषि दुर्वासा एक बार कृष्ण और उनकी पत्नी रुक्मिणी से मिलने गए। ऋषि की इच्छा थी कि श्री कृष्ण और रुक्मणी दोनों उन्हें उनके महल में ले जाए। यह जोड़ा आसानी से सहमत हो गया और ऋषि के साथ उनके महल में जाने लगा। कुछ दूर जाने के बाद रुक्मिणी थक गईं और उन्होंने कृष्ण से कुछ पानी मांगा। कृष्णा ने एक पौराणिक छेद खोदा जो गंगा नदी में लाया गया था। और इससे ऋषि दुर्वासा उग्र हो गए और रुक्मिणी को उसी जगह में रहने के लिए शाप दिया। माना जाता है आज वह मंदिर ठीक उसी स्थान पर स्थित है जहाँ रुक्मणी जी खड़ी थी।

द्वारकाधीश मंदिर द्वारका केसे जाएँ –

अगर आप हिंदू भगवान कृष्ण की नगरी द्वारका में द्वारकाधीश मंदिर की यात्रा करने का प्लान बना रहे हैं और द्वारकाधीश मंदिर द्वारका पहुँचने का आसान तरीका जानना चाहते है,

तो हम आपको बता दें कि द्वारका भारत के गुजरात राज्य में स्थित है, जहां आप परिवहन के विभिन्न साधनों से पहुंच सकते हैं –

फ्लाइट से द्वारकाधीश मंदिर केसे पहुचें –

द्वारका का निकटतम हवाई अड्डा जामनगर में लगभग 145 किमी की दूरी पर स्थित है। यहां पहुंचने के बाद, आप या तो टैक्सी किराए पर ले सकते हैं या द्वारका पहुंचने के लिए बस ले सकते हैं। भारत की वायु सेना के स्वामित्व में, जामनगर हवाई अड्डे पर प्रतिदिन 800 यात्रियों की आवाजाही है और यह एक-दो हवाई जहाज पार्क कर सकता है। यह हवाई अड्डा मुंबई हवाई अड्डे और अन्य  उड़ानों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है और आप एयर इंडिया की उड़ान ले सकते हैं जो कि एकमात्र उड़ान उपलब्ध है। हवाई यात्रा के माध्यम से पहुंचने का एक और तरीका आप अहमदाबाद के लिए एक उड़ान ले सकते हैं जो पूरे देश से बेहतर कनेक्टिविटी और लगातार उड़ानें प्रदान करता है। अहमदाबाद पहुंचने के बाद जो लगभग 463 किमी है, आप बाद में बस या टैक्सी ले सकते हैं।

ट्रेन से द्वारकाधीश मंदिर कैसे पहुंचें –

यदी आपने द्वारकाधीश मंदिर की यात्रा के लिए ट्रेन से ट्रेवल करने के ऑप्शन को सिलेक्ट किया है तो हम आपको द्वारका में खुद का रेलवे जंक्शन मौजूद है जो भारत के सभी प्रमुख शहरों से नियमित ट्रेनों के माध्यम से जुड़ा हुआ है। इसीलिए भारत के किसी भी प्रमुख शहर से ट्रेन द्वरा द्वारकाधीश मंदिर की यात्रा करना काफी आसान है।

सड़क मार्ग द्वारा द्वारकाधीश मंदिर कैसे पहुंचें

राज्य परिवहन गुजरात के विभिन्न शहरों से द्वारका के लिए बसों की उत्कृष्ट सेवाएं प्रदान करता है। आप सूरत, राजकोट या अहमदाबाद से बस ले सकते हैं। निजी बस ऑपरेटर भी हैं जो एसी बसों, स्लीपर बसों और डबल डेकर बसों की पेशकश करते हैं। गुजरात की सड़क यात्रा सुंदर और आरामदायक हैं। आप या तो बस बुक कर सकते हैं या किराए पर टैक्सी ले

द्वारकाधीश मंदिर के आसपास घूमने जगहें –

गुजरात में स्थित द्वारका हिंदुओं के लिए महत्वपूर्ण तीर्थ स्थान और चार धामों में से एक है, जहाँ द्वारकाधीश मंदिर के साथ साथ नीचे दिए गये अन्य कई प्रसिद्ध मंदिर और पर्यटक स्थल मौजूद है। जिन्हें आपको अपनी द्वारकाधीश मंदिर की यात्रा में घूमने अवश्य जाना चाहिये।

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर
बेट द्वारका आइलैंड
द्वारका बीच
रुक्मणीदेवी मंदिर
लाइटहाउस
गोमती घाट
गोपी तालाब
भड़केश्वर महादेव मंदिर
गीता मंदिर
सुदामा सेतु
इस्कॉन
स्वामी नारायण मंदिर
डनी पॉइंट









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