संदेश

जुलाई, 2023 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं
चित्र
  खजराना गणेश मंदिर इंदौर चलिए जानते है संपूर्ण जानकारी खजराना गणेश मंदिर (Khajrana Ganesh Mandir) भारत का दिल कहे जाने वाले मध्य प्रदेश की सबसे प्रसिद्ध नगरी इंदौर में स्थित है। मध्य प्रदेश राज्य अपनी ऐतिहासिकता और सुंदरता के लिए भारत के कोने-कोने से प्रसिद्धि बटोर रहा है। इंदौर शहर मध्य प्रदेश की लोकप्रियता में चार चाँद लगाने के लिए हमेशा अग्रसर रहता है। यह शहर, मध्य भारत का आईटी हब होने के साथ-साथ कई और वजह से नित्य प्रतिदिन चर्चा में रहता है। परन्तु खजराना का गणेश मंदिर इसकी लोकप्रियता का सबसे प्रमुख कारण है। यह मंदिर केवल भारत में ही नहीं बल्कि विश्व भर में ख्याति प्राप्त किये हुए है। यहां की मंदिर व्यवस्था बहुत उच्च कोटि की है। खजराना का यह गणेश मंदिर अपने चमत्कारों के लिए भी अत्यधिक लोकप्रियता घेरे हुए है। आइये जानते है मंदिर से जुड़े चमत्कारिक रहस्यों और कुछ अन्य तथ्यों के बारे में। खजराना गणेश मंदिर का इतिहास History of Khajrana Ganesh Mandir इस मंदिर का निर्माण होल्कर वंश की महारानी अहिल्या बाई होल्कर के द्वारा सन 1735 में करवाया गया था। खजराना गणेश मंदिर में स्थापित मुख

2023, में साईं बाबा का धाम शिरडी आप भी जाना चाहते है ।तो जानिए संपूर्ण महत्वपूर्ण सम्पूर्ण जानकारी।

चित्र
  2023, में  साईं बाबा का धाम शिरडी आप भी जाना चाहते है ।तो जानिए संपूर्ण  महत्वपूर्ण  सम्पूर्ण जानकारी। शिरडी का साईं धाम देशभर में आस्था का एक बड़ा केंद्र है. महाराष्ट्र में अहमदनगर जिले के शिरडी में साईं बाबा (Shirdi Sai Baba) का मंदिर है, जिसकी देखरेख श्री साईंबाबा संस्थान ट्रस्ट करता है. इस मंदिर में लाखों रुपये का चढ़ावा हर साल चढ़ता है. यह मंदिर देश के सबसे धनी मंदिरों में से एक है. देश के अनेक हिस्सों से शिरडी धाम पहुंचने के लिए बस, ट्रेन और हवाई सुविधाएं हैं. आइए जानते हैं शिरडी साईं धाम के बारे में महत्वपूर्ण बातें. शिरडी कैसे पहुंचे? शिरडी तक सड़क, ट्रेन और हवाई मार्ग से आसानी से पहुँचा जा सकता है। अगर आप आसपास के शहरों से शिरडी आ रहे हैं तो आप कार या फिर बस से यात्रा कर सकते हैं। महाराष्ट्र राज्य परिवहन की बहुत सारी बसें शिरडी और कई शहरों के बीच चलाई जा रही हैं जिनका संपूर्ण विवरण आप साईं बाबा संस्थान ट्रस्ट की आधिकारिक वेबसाइट से ले सकते हैं। इसके अलावा कई प्राइवेट बसेस का भी शिरडी से कई शहरों के बीच आना जाना रहता हैं। अगर आप ट्रेन से शिरडी आना चाहते हैं तो आपको निकटतम रे

2023 में क्या आप को भी भुवनेश्वर के 7 प्रसिद्ध मंदिरों के दर्शन करना है चलिए जानते है संपूर्ण जानकारी ।

चित्र
  2023 में क्या आप को भी भुवनेश्वर के 7 प्रसिद्ध मंदिरों के दर्शन करना है चलिए जानते है संपूर्ण जानकारी । भुवनेश्वर का लिंगराज मंदिर लिंगराज मंदिर उडीसा की राजधानी भुवनेश्वर में स्थित है। यहाँ मौजूद मंदिरों में लिंगराज मंदिर को सबसे बडा मंदिर माना जाता है। इस मंदिर को 10वीं या 11वीं शताब्दी में बनवाया गया था। लिंगराज मंदिर भगवान हरिहर को समर्पित एक हिंदू मंदिर है। जो भगवान शिव और विष्णु जी का एक ही रूप है। लिंगराज मंदिर के बारे में लिंगराज मंदिर भारत के सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक है। यह भुवनेश्वर शहर का आकर्षण का केंद्र है। इस शहर को भगवान शिव का शहर कहा जाता है और इसलिए  यहाँ पर भारत के प्रमुख शिव मंदिरों में से एक लिंगराज मंदिर भी स्थापित है। ऐसी मान्यता है कि लिट्टी और वसा नामक दो राक्षसों का वध माँ पार्वती ने यहीं पर किया था। लडाई के बाद जब उन्हें प्यास लगी तो भगवान शिव ने यहाँ पर एक कुएं का निर्माण कर सभी नदियों का आवाहन किया। लिंगराज मंदिर की विशेषता मंदिर का प्रांगण 150 मीटर वर्गाकार है और कलश की ऊँचाई 40 मीटर है। प्रतिवर्ष अप्रैल महीने में यहाँ रथयात्रा का आयोजन किया जा

श्री पदमनाभास्वामी मंदिर के सातवे दरवाजे का रहस्य

चित्र
  श्री पदमनाभास्वामी मंदिर के सातवे दरवाजे का  रहस्य  केरल (Kerala) के ख्यात पद्मनाभस्वामी मंदिर (Sree Padmanabhaswamy Temple) के छह गुप्त दरवाजे खोले जा चुके हैं लेकिन सातवां दरवाजा (seventh sealed door of temple) अब भी रहस्य बना हुआ है. माना जाता है कि इसे खोलना मानव जाति के लिए बहुत बड़ी आपदा ला देगा. मंदिर की कहानी श्री पद्मनाभास्वामी मंदिर. केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में स्थित भगवान विष्णु का प्रसिद्ध मंदिर है. भारत में वैष्णववाद से जुड़े 108 मंदिरों में से एक. इसे सबसे पहले किसने बनाया, कोई नहीं जानता. मान्यता है कि इस स्थान पर सबसे पहले भगवान विष्णु की मूर्ति प्राप्त हुई थी, जिसके बाद उसी स्थान पर मंदिर का निर्माण किया गया. मंदिर के समीप ही एक सरोवर है, जिसे ‘पद्मतीर्थ कुलम’ कहा जाता है. ये मंदिर चेरा और द्रविड़ शैली की वास्तुकला का एक खूबसूरत मिश्रण है और केरल साहित्य और संस्कृति का एक अनूठा संगम भी. यहांं ऊंची दीवारें हैं और 16वीं शताब्दी का गोपुरम भी. मार्तंड वर्मा ने 1733 में इसका पुनर्निर्माण करवाया था. मंदिर की सरंचना में सुधार कार्य किए जाते रहे हैं. यहां गर्भगृह में भ

शनि शिंगणापुर मंदिर महाराष्ट्र ऐसा मंदिर जहां कभी नहीं होती चोरी घरों में या दुकानों में नहीं लगाए जाते हैं दरवाजे।

चित्र
शनि शिंगणापुर मंदिर महाराष्ट्र ऐसा मंदिर जहां कभी नहीं होती चोरी  घरों में या दुकानों में नहीं लगाए जाते हैं दरवाजे। और ताले  शनि शिंगनापुर कहां स्थित है?  भगवान शनि देव को समर्पित शनि शिंगणापुर मंदिर जो कि भारत के राज्य महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के अंतर्गत स्थित एक पौराणिक हिंदू धर्म से जुड़ी एक धार्मिक स्थल है। शनि शिंगणापुर (महाराष्ट्र), शनि शिंगणापुर को भगवान शनिदेव का जन्म स्थान माना जाता है। जनश्रुति है कि उक्त स्थान पर जाकर ही लोग शनि के दंड से बच सकते हैं, किसी अन्य स्थान पर नहीं। जनश्रुति और मान्यता अनुसार यह शनि देव का जन्म स्थान है। शनि शिंगनापुर क्यों प्रसिद्ध है । वैसे तो देश में आपकों हर जगह न्याय के देवता शनि महाराज के मंदिर मिल जाएंगे, लेकिन शनिदेव का एक मंदिर ऐसा भी है, जहां खुले आकाश के नीचे शनि महाराज विराजमान हैं. मान्यता है कि यहां एक बार जो दर्शन करने आ जाता है, उसके सारे दुख-तकलीफ दूर होते हैं. हम बात कर रहे हैं भारत में शनिदेव के सबसे प्रसिद्ध मंदिर में से एक शनि शिंगणापुर मंदिर की गांव के लोग नहीं लगाते ताला इस गांव के लोग कभी अपने घरों में ताला नहीं लगाते. उ

भोजपुर का शिवलिंग क्यों है अधूरा आज भी चलिए जानते है। क्या है पूरा सच भोजपुर के शिवलिंग की संपूर्ण जानकारी

चित्र
   भोजपुर का शिवलिंग क्यों है अधूरा  आज भी चलिए जानते है।  क्या है  पूरा सच भोजपुर के शिवलिंग की संपूर्ण जानकारी भोपाल से 32 किमी की दूरी पर पहाड़ी पर एक बहुत बड़ा अधूरा शिव मंदिर है। ये भोजपुर शिव मंदिर के नाम से जाना जाता है, इस मंदिर का निर्माण परमार वंश के प्रसिद्ध राजा भोज द्वारा किया गया था। ये मंदिर प्रकृति के बीच बना हुआ है, जहां से बेतवा नदी गुजरती है, उसी से सटे इस मंदिर का निर्माण किया गया है। मंदिर के बारे में कहते हैं कि ये एक एकलौता शिवलिंग है जो एक है पत्थर से बना हुआ है। ये भोजपुर शिव मंदिर के नाम से जाना जाता है, इस मंदिर का निर्माण परमार वंश के प्रसिद्ध राजा भोज द्वारा किया गया था। ये मंदिर प्रकृति के बीच बना हुआ है, जहां से बेतवा नदी गुजरती है, उसी से सटे इस मंदिर का निर्माण किया गया है। मंदिर का निर्माण कब हुआ था - मंदिर का निर्माण भारत में इस्लाम के आने से पहले किया गया था, इस मंदिर के छत पर बना अधूरा गुंबद इस बात को दिखाता है कि इसका कार्य आज भी अधूरा है। मंदिर का दरवाजा किसी मंदिर के इमारत के दरवाजे से काफी बड़ा है। माना जाता है कि अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने

ज्वाला मंदिर हिमाचल प्रदेश:

चित्र
  ज्वाला मंदिर हिमाचल प्रदेश: अखंड ज्योति ज्वाला मंदिर जिसको जिसकी ज्योति  बुझाने का प्रयास मुगलों तथा अंग्रेजों ने किया पर वह असफल रहे चलो चलते हैं। जानते संपूर्ण जानकारी ज्वाला मंदिर के बारे में आज हम आपको बताते है देवी मां ज्वाला जी के मंदिर के बारे में हिमाचल प्रदेश में कांगड़ा 30 किलोमीटर दूर ज्वाला देवी का प्रसिद्ध मंदिर है। ज्वाला मंदिर को जोता वाली मां का मंदिर और नगरकोट भी कहा जाता है। यह मंदिर माता के अन्य मंदिरों की तुलना में अनोखा है क्योंकि यहां पर किसी मूर्ति की पूजा नहीं होती है बल्कि पृथ्वी के गर्भ से निकल रही नौ ज्वालाओं की पूजा होती है। 51 शक्तिपीठ में से एक इस मंदिर में नवरात्र में इस मंदिर पर भक्तों का तांता लगा रहता है। बादशाह अकबर ने इस ज्वाला को बुझााने की कोशिश की थी लेकिन वो नाकाम रहे थे। वैज्ञानिक भी इस ज्वाला के लगातार जलने का कारण नहीं जान पाए हैं। अकबर और अंग्रेजों ने की थी ज्वाला बुझाने की कोशिश, लेकिन रहे थे नाकाम अकबर और अंग्रेजों ने की थी ज्वाला बुझाने की कोशिश, लेकिन रहे नाकाम  हिमाचल प्रदेश में कांगड़ा 30 किलोमीटर दूर ज्वाला देवी का प्रसिद्ध मंद

मक्‍केश्‍वर महादेव शिवलिंग कहा है ये शिवलिंग जानिए संपूर्ण जानकारी

चित्र
  मक्‍केश्‍वर महादेव शिवलिंग कहा है ये शिवलिंग जानिए संपूर्ण जानकारी इस्लाम में सर्वाधिक पूजनीय स्थल ‘काबा’ भी प्रागैस्लामी समय का शिवमन्दिर ही है जिसकी घनाकार इमारत के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में शिवलिंग ही स्थापित है जिसे अरबी में ‘अल्-हज़र-अल्-अस्वद’ और फ़ारसी में ‘संग-ए-अस्वद’ अथवा ‘काला पत्थर’ कहा जाता है। ‘संग’ का अर्थ है पत्थर और ‘अस्वद’ का अर्थ है अश्वेत (काला) यदि मुसलमान अपने सबसे पूजनीय काले पत्थर का हिंदुत्व से कोई सम्बन्ध नहीं मानते हैं, तो इसे काबा के ईशान कोण में ही क्यों स्थापित किया गया? क्योंकि इस्लाम में तो प्रत्येक वैदिक मान्यता का विपरीत ही किया जाता है। उल्लेखनीय है कि काबा के ईशान कोण में स्थापित शिवलिंग पर ॐ की आकृति भी स्पष्ट उत्कीर्ण है। संलग्न पहले चित्र को जूम करके देखें। यदि यह शिवलिंग नहीं है, तो इसपर ‘ॐ’ क्यों उत्कीर्ण है? काबा में शिव और मक्का मदीना का रहस्य द्वारिका शारदा पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती का मानना है कि मक्का में मक्केश्वर महादेव मंदिर है। मुहम्मद साहब भी शैव थे, इसलिए वे मक्केश्वर महादेव को मानते थे। एक बार वहां लोगों

उज्जैन में एक ऐसा मंदिर काल भैरव बाबा का जहां चढ़ाई जाती है शराब । भोग लगाया जाता है इनको शराब का जानिए संपूर्ण जानकारी

चित्र
  उज्जैन में एक ऐसा मंदिर काल भैरव बाबा का जहां चढ़ाई जाती है शराब । भोग लगाया जाता है इनको शराब का जानिए संपूर्ण जानकारी Kaal Bhairav Temple Ujjain : आज हम आपको उज्जैन स्थित बाबा काल भैरव मंदिर के ऐसे रहस्य के बारे में बता रहे हैं, जहां पर उन्हें शराब का भोग लगाया जाता है और भगवान काल भैरव इस शराब को पी जाते हैं. इस मंदिर को पुरात्तव विभाग और वैज्ञानिक भी भगवान का चमत्कार बताते हैं हमारे देश में ऐसे अनेक मंदिर हैं, जो अपनी अनोखी परंपरा व रहस्यों के लिए जाने जाते हैं। ऐसा ही एक मंदिर है मप्र के उज्जैन में स्थित भगवान कालभैरव का। इस मंदिर के संबंध चमत्कारी बात ये है कि यहां स्थित कालभैरव की प्रतिमा मदिरा (शराब) का सेवन करती है लेकिन मदिरा जाती कहां है ये रहस्य आज भी बना हुआ है। प्रतिमा को मदिरा पीते हुए देखने के लिए यहां देश-दुनिया से काफी लोग पहुंचते है काल भैरव मंदिर का रहस्य – हमारे देश में कई मंदिर हैं, जो अपनी अनोखी परंपराओं और रहस्यों के लिए जाने जाते हैं। ऐसा ही एक मंदिर मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित, भगवान काल भैरव का मंदिर है। इस मंदिर की चमत्कारी और रहस्यमयी बात यह है कि य

ऐसा शिवलिंग जो डूबा रहता है समुद्र में जहां पांडवों ने धोए थे अपने पाप मुक्ति पाई थी अपने पापों से ऐसा है निष्कलंकमहादेव मंदिर

चित्र
   ऐसा शिवलिंग जो डूबा रहता है समुद्र में जहां पांडवों ने धोए थे अपने पाप मुक्ति पाई थी अपने पापों से  ऐसा है   निष्कलंकमहादेव मंदिर निष्कलंक महादेव मंदिर: महादेव का एक ऐसा मंदिर जो आज भी समुद्र में डूब जाता है। गुजरात का निष्कलंक मंदिर, जो अरब सागर में मौजूद है। इस मंदिर में एक नहीं बल्कि 5 शिवलिंग है। शिव लिंग के यहां होने के पीछे एक बहुत बड़ा रहस्य छुपा है। तो चलिए आपको बताते हैं, कि वो रहस्य क्या है।     निष्कलंक महादेव मंदिर में 5 हजार साल से  विराजमान हैं स्वयंभू शिवलिंग कहा जाता है, महाभारत का युद्ध समाप्त हो चुका था। तब पांडव बहुत दुःखी थे, क्योंकि उनके द्वारा अपने ही सगे-संबंधियों की हत्या का पाप उन पर लगा था। इस पाप से मुक्त होने के लिए उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण से सहायता मांगी, और मार्गदर्शन करने की गुजारिश की। तब भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें एक काली गाय और काला ध्वज दिया। जिसके बाद उन्होंने पांडवों से कहा कि इस ध्वज को लेकर काली गाय का अनुसरण करों, और जहां भी गाय और ध्वज दोनों का रंग सफेद हो जाएगा, उसी स्थान को समझ लेना कि यह उनकी पाप से मुक्ति का स्थान है। श्रीकृष्ण की आज्

भारत में एक ऐसा शिवलिंग है जहा हिंदुओं के साथ मुसलमान भी करते हैं पूजा, जाने पूरी जानकारी

चित्र
  Shivling Puja: भगवान भोलेनाथ का एक ऐसा मंदिर जहां हिंदुओं के साथ मुसलमान भी करते हैं पूजा, जानें Shivling Puja: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले का एक गांव सरया तिवारी है. इस गांव में भगवान भोलेनाथ का कई सौ साल पुराना एक अद्भुत शिवलिंग है. इस शिवलिंग की पूजा हिंदुओं के साथ-साथ मुस्लिम भी करते हैं Shivling Puja: हिन्दू धर्म में भगवान भोलेनाथ की अपनी अलग ही महिमा है. भगवान भोलेनाथ की इसी महिमा के चलते पूरे देश में कई मंदिर बने हुए हैं. देश के अलग-अलग भागों में बने हुए इन मंदिरों में पूजा-पाठ अथवा दर्शन के लिए हिन्दू धर्म के भक्तों का साल भर तांता लगा रहता है. वहीँ हमारे देश में भगवान भोलेनाथ का एक मंदिर ऐसा भी है जहां पर हिंदुओं के साथ ही साथ मुस्लिम भी पूजा करने के लिए जाते है. आइए जानें इस अद्भुत शिवलिंग के बारे मे कहां स्थित शिवलिंग ? उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में स्थित है यह मंदिर: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले से मात्र 25 किलोमीटर की दूरी पर एक क़स्बा है खजनी. इसी खजनी कस्बे के पास सरया तिवारी नामक एक गांव है. इसी गांव में भगवान भोलेनाथ का एक ऐसा अद्भुत शिवलिंग है जिसकी पूजा हिन्दू

कहा है काले हनुमान? जानिए उनकी कथा

चित्र
  कहा है काले हनुमान? जानिए उनकी कथा काले हनुमानजी मन्दिर   काले हनुमान जी मंदिर जयपुर में हवा महल के पास स्थित है। यह भारत के सबसे पुराने मंदिरों में से एक है जिसे 1000 साल पहले बनाया गया था। यह मंदिर महाबजरंग बलि  हनुमान जी  के नाम  से प्रसिद्ध है,जो रंग में काला है  इस मंदिर में स्थापित महाबजरंगबलि हनुमान जी  भगवान राम के पार्टी अपनी ईमानदारी के लिए जाने जाते हैं, हनुमान जी की मूर्ति या तो नारंगी या लाल रंग में होती है  हालांकि, काले हनुमानजी अपने अद्वितीय रंग देवता के लिए विश्वव्यापी प्रसिद्ध हैं। भक्त धार्मिक स्थान के अंदर एक अलग अंतर्दृष्टि महसूस करते हैं और इस प्रकार उनके दिल में इतनी सारी मान्यताओं को लेते हैं। इस मंदिर के बारे में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह भक्तों को आध्यात्मिक और धार्मिक अनुभव प्रदान करता है।  जो लोग बीमारियों से पीड़ित हैं वे स्वास्थ्य, धन और ज्ञान हासिल करने के लिए विशेष हनुमानजी मंत्र का जप करने के लिए यहाँ आते हैं । यह मंदिर न केवल पर्यटक बिंदु या गंतव्य के रूप में बहुत प्रसिद्ध और प्रमुख है बल्कि इसकी प्राचीन लोकप्रियता और भारतीय परंपरा के लिए भी