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श्री खाटू श्याम जी मंदिर के बारे में संपूर्ण जानकारी दर्शन यत्रा के बारे मे

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  श्री खाटू श्याम जी मंदिर के बारे में संपूर्ण जानकारी दर्शन यत्रा के बारे मे 1.  श्री खाटू श्याम मंदिर की जानकारी खाटू श्याम मंदिर भारत के फेमस मंदिर में से एक हैं। यह भगवान कृष्ण से समर्पित मंदिर हैं। खाटू श्याम मंदिर भारत के राजस्थान राज्य के सीकर जिले से करीब 65 किलो मीटर की दूरी पर एक छोटे से गांव का प्रसिद्ध हिंदू मंदिर हैं। खाटू श्याम मंदिर में प्रत्येक वर्ष करीब 90 लाख से अधिक भक्त खाटू श्याम के दर्शन करने के लिए आते हैं। भक्तों का मानना है कि खाटू श्याम के मंदिर में सभी की मनोकामना पूर्ण होती हैं। खाटू श्याम मंदिर कृष्ण भगवान के प्रसिद्ध मंदिर में से एक हैं। आज के इस आर्टिकल में हम आपको खाटू श्याम मंदिर (khatu shyam ji mandir) की जानकारी देंगे। खाटू श्याम मंदिर कहाँ हैं?, खाटू श्याम मंदिर कैसे जाएं?, इन सभी प्रश्नों की जानकारी आपको इस लेख मिलेगी। Table of Contents 1.खाटू श्याम मंदिर का इतिहास 2.खाटू श्याम मंदिर का निर्माण 3.खाटू श्याम मंदिर कहाँ है? 4.खाटू श्याम मंदिर जाने का समय 5.खाटू श्याम जाने का रास्ता 6.बस और ट्रेन द्वारा खाटू श्याम कैसे जाएं? 7.वायुयान से खा

दर्शन और उनके प्रवर्तक

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  षड्दर्शनों के नाम हिंदू धर्म में, "दर्शन" शब्द का अर्थ अद्वैत सिद्धांत और तत्वज्ञान को समझने के लिए प्रयोग किया जाता है। यह षड्दर्शन (Six Darshanas) के रूप में भी जाने जाते हैं और ये वैदिक दर्शन आपात शास्त्र के मान्यताओं के आधार पर विकसित हुए हैं। निम्नलिखित हैं छः प्रमुख दर्शन: न्याय दर्शन (Nyaya Darshana): यह दर्शन मूलतः न्याय और तर्क के सिद्धांत पर आधारित है और सत्य को प्रमाणित करने के लिए मार्गदर्शन प्रदान करता है। वैशेषिक दर्शन (Vaisheshika Darshana): इस दर्शन के माध्यम से प्रकृति, पदार्थ, गुण, द्रव्य और इनके संबंधों का अध्ययन किया जाता है। सांख्य दर्शन (Samkhya Darshana): सांख्य दर्शन ज्ञान, पुरुष और प्रकृति के सिद्धांतों पर आधारित है, और इसे द्वैत दर्शन के रूप में भी जाना जाता है। योग दर्शन (Yoga Darshana): योग दर्शन मार्गदर्शन के रूप में कार्य करता है, जो मन, शरीर और आत्मा के एकीकरण को प्रमाणित करने के लिए साधनाओं की विधियों पर आधारित होता है। पूर्व मीमांसा दर्शन (Purva Mimamsa Darshana): यह दर्शन वेदों के अध्ययन और उनके यथार्थ अर्थ के अनुसार कर्मका

बाबा रामदेव योगा और वेट लॉस डाइट प्लान

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      बाबा रामदेव योगा और वेट लॉस डाइट प्लान रामदेव बाबा का योग एक अद्वितीय योग सिद्धांत है जिसे स्वामी रामदेव बाबा ने विकसित किया है। यह योग प्रणायाम, आसन, ध्यान और आहार की विशेषताओं को सम्मिलित करता है। इसे हिंदी में "पतंजलि योग" या "पतंजलि सिद्धांत" के रूप में भी जाना जाता है। रामदेव बाबा के योग आपको शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से स्वस्थ रखने में मदद करता है। यह आपके शरीर, मस्तिष्क और आत्मा को संतुलित और सक्रिय बनाने के लिए विभिन्न तकनीकों का उपयोग करता है। यहां कुछ प्रमुख रामदेव बाबा के योग प्रदर्शित किए गए हैं: कपालभाति: इस प्राणायाम में श्वास यात्रा के दौरान पेट को निम्नांतरित और उच्चारित वायु को निकालने के लिए व्यायाम किया जाता है। अनुलोम-विलोम: यह प्राणायाम नाड़ी शोधन के लिए जाना जाता है, जिसमें आप दाहिने और बाईं नाक से श्वास लेते हैं। भस्त्रिका प्राणायाम: इस तकनीक में आप श्वास के साथ निकाली हुई वायु को बाहर निकालते हैं, जो मस्तिष्क को ताजगी और स्पष्टता प्रदान करता है। आसन: रामदेव बाबा के योग में विभिन्न आसन शामिल हैं, जैसे कि पद्मासन, वज्रासन, भु

वजन घटाने के लिए योग (Yoga for weight loss)

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  वजन घटाने के लिए योग (Yoga for weight loss) योग वजन घटाने के लिए एक उपयुक्त तरीका हो सकता है, और कई योगासन वजन कम करने में मदद कर सकते हैं। योग वजन घटाने के लिए उपयोगी होता है क्योंकि इससे आपके शरीर को शक्ति मिलती है, मोटापा कम होता है, शरीर की सुजान कम होती है, और मानसिक स्थिति में सुधार होता है। योग के कई प्रकार होते हैं, लेकिन नीचे दिए गए योगासन वजन घटाने के लिए सर्वोत्तम माने जा सकते हैं: 1.सूर्य नमस्कार (Surya Namaskar): सूर्य नमस्कार एक पूर्ण शरीर का व्यायाम है जो वजन कम करने के लिए उत्तम होता है। इसमें कई आसन होते हैं जो शरीर के सभी हिस्सों को सक्रिय करते हैं। 2.पवनमुक्तासन (Pawanmuktasana): यह आसन पेट के मोटापे को कम करने में मदद करता है। इसके अलावा, इसे करने से पेट की गैस, एसिडिटी और कब्ज से राहत मिलती है। 3.भुजंगासन (Bhujangasana): भुजंगासन योग आसन पेट की चर्बी को कम करने में मदद करता है और पीठ की कमर और पीठ अंग को मजबूत बनाता है। 4.उष्ट्रासन (Ustrasana): यह आसन पेट की चर्बी को कम करने में मदद करता है और हृदय की क्षमता को बढ़ाता है। इसके अलावा, इसे करने से पीठ, गर्दन और पैर

ओम योग

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                          ओम योग ओम योग एक प्राचीन ध्यान तकनीक है जिसे हिंदू धर्म में उद्भव की गई है। यह एक ध्यान आधारित योग प्रथा है जिसमें शरीर, मन और आत्मा के एकीकरण का प्रयास किया जाता है। ओम योग का मूल उद्देश्य मन की शांति, आंतरिक स्थिरता, और चित्त के वृत्तियों को नियंत्रित करना है। ओम शब्द संस्कृत में "आदिम ध्वनि" को दर्शाता है और यह सबसे प्राचीन और पवित्र ध्वनि माना जाता है। इसलिए, ओम योग में ओम का उच्चारण एक महत्वपूर्ण अंग है। ओम का उच्चारण करने से पहले, योगी ध्यान की अवस्था में जाता है और अपने मन को एकाग्र करता है। फिर वह अपनी सांस लेते हुए "ओम" का ध्वनि करता है, जिसे धीरे-धीरे बढ़ाते हैं और फिर धीरे-धीरे कम करते हैं। इसके द्वारा, योगी अपने मन को शांत करने और आत्मा के साथ एकता महसूस करने का प्रयास करता है। ओम योग के लाभों में मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को सुधारने, मानसिक चिंताओं को कम करने, तनाव को दूर करने, चित्त की स्थिरता और उच्च स्तर की ध्यान क्षमता को विकसित करने शामिल हैं। इसके अलावा, ओम योग में सांस लेने की तकनीकें भी शारीरिक लाभ प्रदान कर सकती है

Type of yoga beginner

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                    योगा के प्रकार 1.(Hatha Yoga): हठ योग एक शारीरिक और मानसिक योग प्रकार है जिसमें आसन, प्राणायाम और ध्यान के तत्व शामिल होते हैं। यह शुरुआती योगीयों के लिए अच्छा होता है क्योंकि इसमें आसानों को सही ढंग से करने की तकनीकें सिखाई जाती हैं। 2.विन्यासा योग (Vinyasa Yoga): विन्यासा योग एक ध्यान केंद्रित योग प्रकार है जिसमें संगठित आसन सिरीज़ और सही श्वास के साथ एकीकृत गति का उपयोग किया जाता है। यह योग आसनों को समृद्ध करने, स्थिरता बढ़ाने और मन को शांत करने में मदद करता है। 3.आईयेंगार योग (Iyengar Yoga): आईयेंगार योग विशेष ध्यान और नियंत्रण को बढ़ाने के लिए खास उपकरणों और सहायता का उपयोग करता है। यह शुरुआती योगीयों के लिए अच्छा होता है क्योंकि यह उन्हें सही पोज़ को जानने और सही ढंग से करने में मदद करता है। 4.सहज योग (Sahaja Yoga): सहज योग में मुख्य ध्यान शक्तियों के जागरण पर ध्यान केंद्रित होता है। यह योगीयों को अपनी आंतरिक शांति, स्वास्थ्य, और प्राकृतिक संतुलन को प्राप्त करने में मदद करता है। 5.हठ योग (Hatha Yoga): हठ योग एक शारीरिक योग प्रणाली है जिसमें आसन, प्राणाया

दर्शन चक्र क्रिया

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                        दर्शन चक्र क्रिया दर्शन चक्र क्रिया, एक प्रभावी ध्यान प्रयास है जिसे कि कुंडलिनी जागृति और मन की शांति को बढ़ाने के लिए किया जाता है। इस क्रिया को हिंदी में भी दर्शन चक्र क्रिया के नाम से जाना जाता है। इस क्रिया का उद्देश्य मन को स्थिर करना, चिंताओं को दूर करना, और आध्यात्मिक अनुभव को प्राप्त करना है। यहां दर्शन चक्र क्रिया के लिए ध्यान का एक सरल मार्ग दिया गया है: सीधे बैठें और अपने शरीर को सुखी, स्थिर और आरामदायक स्थिति में रखें। आंखें बंद करें और आंतरिक ध्यान को सक्रिय करें। उद्दीपन मुद्रा बनाएं: अपने दाएं हाथ की मध्यमा उंगली को अपने अंगूठे और मध्यमा उंगली के अंगूठे से स्पर्श करें। इसे हाथ की ऊर्ध्व मुद्रा कहा जाता है। श्वास लें: गहरी सांस लें और उसे धीरे-धीरे छोड़ें। सांस लेने के बाद थोड़ा सा ध्यान करें और ध्यान केंद्र में आत्मा को महसूस करें। मंत्र का जाप करें: "वाहे गुरु" का मंत्र जाप करें। हर बार इस मंत्र को जपते समय, आंखों को आंतरिक ध्यान में एकाग्र करें और ध्यान के केंद्र में मंत्र की ध्वनि को सुनें। क्रमिक विभाजन: 5 म

आत्म दर्शन

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आत्मदर्शन: ज्ञान और पहचान आत्मदर्शन एक आध्यात्मिक अनुभव है जो व्यक्ति को अपने आत्मा के साथ एक मेल की अनुभूति कराता है। यह अनुभव व्यक्ति को उसके असली स्वरूप, अंतर्निहित शक्तियों और अविच्छिन्न ज्ञान की पहचान कराता है। आत्मदर्शन एक आध्यात्मिक अभ्यास है जिसमें व्यक्ति अपने मन को शांत करके अपने आंतरिक अंधकार को देखने का प्रयास करता है। यह अवस्था ध्यान, मेधावीता, मनन और निरीक्षण द्वारा प्राप्त की जा सकती है। आत्मदर्शन के द्वारा व्यक्ति अपने मन की गहराईयों, भावनाओं, विचारों और संस्कारों का ज्ञान प्राप्त करता है और अपने साथी जीवों, पर्यावरण और ब्रह्मा जैसे अन्य तत्वों के साथ अपने संबंध को समझता है। आत्मदर्शन के माध्यम से व्यक्ति अपने असली आत्मा के अतीत, वर्तमान और भविष्य की अनुभूति करता है। यह उसे आनंद, शांति, समृद्धि और स्वतंत्रता का अनुभव कराता है। आत्मदर्शन के माध्यम से व्यक्ति अपने जीवन के उद्देश्य और मार्ग को समझता है और अपनी सामर्थ्यों, क्षमताओं और प्रकृति को जानता है। आत्मदर्शन आनंद, ज्ञान, और आन्तरिक शांति के लिए महत्वपूर्ण है। यह व्यक्ति को अपने आप से जुड़े संबंधों, दुख और सुख क

Yog darshan

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 योग दर्शन (Yoga Darshan) भारतीय दर्शनिक परंपरा में से एक है जो योग के सिद्धांतों और अभ्यास को समझाती है। योग दर्शन में योग को एक पूर्ण जीवनशैली के रूप में व्याख्यान किया जाता है, जो शरीर, मन और आत्मा के एकीकरण और समानता को प्रमोट करने के लिए उन्नत तकनीकों का अध्ययन करता है। यह दर्शन योग सूत्रों में व्याख्यात किया गया है, जिन्हें महर्षि पतञ्जलि ने लिखा है। योग दर्शन के अनुसार, योग एक प्रकार का मार्ग है जिसके माध्यम से चित्त को शांत, स्थिर और एकाग्र किया जा सकता है। यह चित्त को विभिन्न चिंताओं, आवेगों और विक्षेपों से मुक्त करके मन की शुद्धि और संतुलन को प्राप्त करने का उपाय माना जाता है। योग द्वारा हम अपने अंतरंग और बाह्य जीवन को संतुलित करने, शरीर की स्वास्थ्य और ऊर्जा को बढ़ाने, मन की शांति और उच्च स्तर की चेतना को प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। योग दर्शन में आठ अंग (अष्टांग) कहलाए जाते हैं, जिन्हें आराम्भिक, बहिराम्भ, आयाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान, समाधि और समाधि समाप्ति के रूप में वर्गीकृत किया गया है। योग दर्शन में ध्यान को महत्वपूर्ण स्थान दिया जाता है, क्योंकि इसमें मन की स्थि

सुदर्शन चक्र

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सुदर्शन चक्र हिन्दू मिथोलॉजी में कई कथाएं हैं जो सुदर्शन चक्र के उपयोग को दर्शाती हैं। इस चक्र को भगवान विष्णु के चतुर्भुज अवतार, श्रीकृष्ण के हाथ में प्रमुखतः देखा जाता है। यह चक्र भगवान विष्णु की शक्ति, न्याय और धर्म के प्रतीक के रूप में माना जाता है और उसे दुष्टों और अधर्मी शक्तियों का नाश करने के लिए उपयोग किया जाता है। सुदर्शन चक्र हिन्दू धर्म में एक प्रमुख प्रतीक माना जाता है और यह विशेष रूप से विष्णु भक्ति में महत्त्वपूर्ण है। इसे शक्ति, सुरक्षा और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है और यह मान्यता है कि सुदर्शन चक्र के धारक को सभी बुराईयों और कठिनाइयों को दूर करने की शक्ति प्राप्त होती है सुदर्शन चक्र को हिन्दू पौराणिक ग्रंथों में विस्तृत रूप से व्याख्यात किया गया है। इसकी व्याख्या अलग-अलग ग्रंथों और कथाओं में थोड़ी भिन्न हो सकती है, लेकिन निम्नलिखित व्याख्या सबसे प्रसिद्ध है: सुदर्शन चक्र को भगवान विष्णु की एक विशेष आयुध माना जाता है। यह चक्र दैवी शक्ति से युक्त होता है और विष्णु के विशेष अवतार, जैसे कि श्रीकृष्ण और नारायण, के हाथों में प्रमुखतः देखा जाता है। सुदर्शन चक्